
Parenting Tips: लोरी सुनने के बाद भी नहीं सो रहा है बच्चा, तो अपनाएं ये तरीके
छोटे बच्चों का समय पर और अच्छी नींद लेना उनके शारीरिक और मानसिक विकास के लिए बेहद जरूरी माना जाता है। हालांकि कई बार ऐसा होता है कि माता-पिता बच्चे को लोरी सुनाते हैं, गोद में सुलाते हैं, फिर भी वह देर तक जागता रहता है या बार-बार उठ जाता है। इसकी वजह सिर्फ जिद नहीं होती, बल्कि भूख, असहज माहौल, गलत स्लीप रूटीन या दिनभर की गतिविधियों का असर भी हो सकता है। ऐसे में घबराने या बच्चे पर गुस्सा करने की बजाय उसकी जरूरतों को समझना ज्यादा जरूरी है। अगर कुछ आसान आदतों को रोजमर्रा की दिनचर्या में शामिल किया जाए, तो बच्चे को आरामदायक नींद लेने में मदद मिल सकती है।
सोने का समय रोज एक जैसा रखें
बच्चों के लिए नियमित स्लीप रूटीन बनाना बहुत जरूरी होता है। कोशिश करें कि हर दिन बच्चे को लगभग एक ही समय पर सुलाएं और सुबह भी तय समय पर उठाएं। सोने से पहले हल्की लोरी, कहानी सुनाना या शांत माहौल बनाना अच्छी आदत हो सकती है। जब बच्चा रोज एक जैसा रूटीन अपनाता है, तो उसका शरीर भी उसी समय नींद के लिए तैयार होने लगता है। इससे सोने में आसानी हो सकती है।
कमरे का माहौल रखें आरामदायक
अगर कमरे में बहुत ज्यादा रोशनी, शोर या गर्मी है, तो बच्चे को सोने में परेशानी हो सकती है। कमरे का तापमान आरामदायक रखें और तेज आवाज से बचें। बच्चे के कपड़े भी मौसम के अनुसार आरामदायक होने चाहिए। अगर बच्चा बहुत छोटा है, तो यह भी सुनिश्चित करें कि उसे भूख, गीला डायपर या किसी तरह की असुविधा न हो। आरामदायक वातावरण बच्चे को जल्दी नींद आने में मदद कर सकता है।
सोने से पहले स्क्रीन और ज्यादा गतिविधियों से बचाएं
बड़े बच्चों को सोने से ठीक पहले मोबाइल, टीवी या टैबलेट देखने की आदत से बचाना बेहतर होता है। स्क्रीन की तेज रोशनी नींद के प्राकृतिक चक्र को प्रभावित कर सकती है। इसके बजाय सोने से पहले शांत गतिविधियां जैसे कहानी पढ़ना, हल्की बातचीत या धीमा संगीत बेहतर विकल्प हो सकते हैं। दिनभर पर्याप्त शारीरिक गतिविधि भी बच्चे की ऊर्जा संतुलित रखने में मदद करती है, जिससे रात में नींद बेहतर आ सकती है।
बच्चे के संकेतों को समझें
हर बच्चा अलग होता है और उसकी नींद की जरूरत भी अलग हो सकती है। अगर बच्चा आंखें मलना, जम्हाई लेना या चिड़चिड़ा होना शुरू कर दे, तो यह नींद आने के संकेत हो सकते हैं। ऐसे समय में उसे देर तक जगाने की बजाय सुलाने की कोशिश करें। यदि बच्चा लंबे समय तक लगातार सोने में कठिनाई महसूस कर रहा हो, बहुत बेचैन रहता हो, तेज खर्राटे लेता हो या उसकी नींद से जुड़ी समस्या रोजमर्रा की दिनचर्या को प्रभावित कर रही हो, तो बाल रोग विशेषज्ञ से सलाह लेना उचित रहेगा। धैर्य, नियमित दिनचर्या और प्यार भरा माहौल बच्चे को अच्छी और सुकूनभरी नींद दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
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