Parenting : परवरिश का ककहरा कहीं आप भी तो नहीं कर रहे पैरेंटिंग की ये 5 अनजानी भूलें

Parenting : परवरिश का ककहरा कहीं आप भी तो नहीं कर रहे पैरेंटिंग की ये 5 अनजानी भूलें

बचपन में बच्चों को मिलने वाला माहौल और हमारा व्यवहार ही उनके भविष्य के आत्मविश्वास की नींव रखता है। यहाँ पैरेंटिंग की उन 5 आम मगर गंभीर कमियों को बेहद आसान शब्दों में समेटने की कोशिश की गई है जिन्हें समय रहते सुधारना जरूरी है। 

सहानुभूति की जगह तुलना का तराजूः 

अक्सर हम बच्चों को मोटिवेट करने के चक्कर में उनकी तुलना क्लास के टॉपर या पड़ोस के बच्चों से करने लगते हैं। यह तरीका काम करने के बजाय बच्चे के अंदर हीन भावना भर देता है। हमें यह स्वीकार करना होगा कि हर बच्चा अपने आप में अनोखा है और उसकी अपनी एक खूबी है। 

अधूरी बातें और टूटता संवादः 

दिनभर की व्यस्तता के बाद जब बच्चा अपनी स्कूल की कोई छोटी सी बात या अपनी फीलिंग्स शेयर करना चाहता है तो कई बार हम हाँ-हूँ करके बात टाल देते हैं। जब बच्चों को घर में पूरा ध्यान नहीं मिलता, तो वे धीरे-धीरे अपने दिल की बात छुपाने लगते हैं। बच्चों की बात सुनना उनके साथ एक मजबूत इमोशनल बॉन्ड बनाने का सबसे पहला कदम है। 

ओवर-प्रोटेक्टिव रवैया और फैसलों पर पहराः 

अनुशासन और रोक-टोक में एक बारीक लकीर होती है। बच्चे को क्या पहनना है, किससे बात करनी है और क्या पसंद करना है अगर हर चीज हम ही तय करेंगे तो बच्चा कभी आत्मनिर्भर नहीं बन पाएगा। उन्हें छोटे छोटे फैसले खुद लेने की आजादी दें इससे उनका खुद पर भरोसा बढ़ेगा। 

डिजिटल खिलौना यानी मोबाइल का शॉर्टकटः 

बच्चा रो रहा है या खाना नहीं खा रहा तो झट से उसके हाथ में स्मार्टफोन थमा देना आज का सबसे आसान समाधान बन गया है। लेकिन यह शॉर्टकट आगे चलकर उनकी नींद चिड़चिड़ेपन और कमजोर एकाग्रता का बड़ा कारण बनता है। स्क्रीन की जगह उन्हें आउटडोर गेम्स कॉमिक्स या आपके साथ वक्त बिताने की आदत डालें। 

नंबरों की रेस में बचपन का खो जानाः 
हमारा पूरा फोकस इस बात पर रहता है कि रिपोर्ट कार्ड में नंबर कितने आए। पढ़ाई बेशक जरूरी है लेकिन हर वक्त बेहतर करने का स्ट्रेस बच्चों के मानसिक विकास को रोक देता है। एक खुशहाल और कामयाब इंसान बनने के लिए पढ़ाई के साथ-साथ खेलकूद हॉबीज और मानसिक सुकून भी उतना ही जरूरी है। अच्छी पैरेंटिंग परफेक्ट होने का नाम नहीं है बल्कि यह बच्चों की भावनाओं को समझने और उन्हें एक ऐसा सुरक्षित कोना देने का नाम है जहाँ वे बिना किसी डर के खुलकर सांस ले सकें। 

- हेमलता शर्मा, जयपुर

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