मकर संक्रांति पर इस मंदिर में लगता है लाखों श्रद्धालुओं का तांता, पड़ती है सूर्य की पहली किरण

मकर संक्रांति पर इस मंदिर में लगता है लाखों श्रद्धालुओं का तांता, पड़ती है सूर्य की पहली किरण

खरगोन। मध्य प्रदेश की धरती पर कई ऐतिहासिक और पौराणिक मंदिर हैं, जहां भक्त अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए आते हैं। प्रदेश सभ्यता और आध्यात्म का केंद्र है, जहां खजुराहो की विरासत और बाबा महाकाल का आशीर्वाद भी है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि मध्य प्रदेश के खरगोन को नवग्रह की नगरी भी कहा जाता है? यहां देश का एकमात्र सूर्य प्रधान नवग्रह मंदिर है। 

मकर संक्रांति का सीधा संबंध सूर्य भगवान से होता है, क्योंकि इस दिन सूर्य धनु राशि से मकर राशि में परिवर्तन करते हैं। इस लिहाज से खरगोन के सूर्य प्रधान नवग्रह मंदिर में भक्तों का तांता लगता है। माना जाता है कि मकर संक्रांति के पहले दिन इसी मंदिर पर सूरज की पहली किरण पड़ती है। 300 साल पुराने इस मंदिर में त्रिदेव, बारह राशि, और बारह ग्रहों की पूजा की जाती है। अगर ग्रह असंतुलित है और किसी भी प्रकार के कष्ट दे रहे हैं तो इस मंदिर में दान और पूजा करने से मुश्किलों का हल मिलता है। 

मंदिर में हर ग्रह के नाम पर एक पोटली दान की जाती है। पोटली में ग्रह से जुड़ी चीजें होती हैं, जो कष्टों के निवारण में सहायक हैं। सूर्य प्रधान मंदिर होने की वजह से ही मकर संक्रांति के दिन मंदिर में लाखों भक्तों की भीड़ सूर्य भगवान का आशीर्वाद लेने के लिए आती है। मंदिर की वास्तुकला दक्षिण भारत की शैली से प्रेरित होकर बनाई गई है। मंदिर में प्रतिमाओं का आकार और शैली भी दक्षिण भारत से मिलती-जुलती है। मंदिर की दीवारों पर बारीक नक्काशी और देवी-देवताओं की प्रतिमाएं भी देखने को मिलती हैं, जो इसे मध्य प्रदेश के बाकी मंदिरों से अलग बनाती है। 

मंदिर के तीन शिखर भी इसे अद्भुत बनाते हैं। तीन शिखर ब्रह्मा, विष्णु और महेश के प्रतीक हैं। पौराणिक कथा की मानें तो मां बगलामुखी ने एक पंडित को स्वप्न में आकर मंदिर बनाने का आदेश दिया था। यही वजह है कि मंदिर के गर्भगृह में भगवान सूर्य की प्रतिमा के साथ मां बगलामुखी की प्रतिमा भी मौजूद है। इसके अलावा, बाकी 8 ग्रहों की प्रतिमा और सवारी भी मंदिर में स्थापित की गई हैं। 


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