
आधुनिक परवरिश : सिर्फ बेटियों को ही नहीं बेटों को भी सिखाएं ये 5 जरूरी काम
आज के बदलते दौर में आत्मनिर्भर होना हर किसी के लिए जरूरी है चाहे वह बेटा हो या बेटी। अक्सर हमारे समाज में बेटियों को बचपन से ही घर के कामों में निपुण किया जाता है लेकिन बेटों को इन बुनियादी चीजों से दूर रखा जाता है।
असल में घर के बेसिक काम किसी जेंडर लिंग से नहीं बल्कि लाइफ स्किल्स यानी जीवन जीने के जरूरी हुनर से जुड़े हैं।
मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि जो लड़के बचपन से घर के कामों में हाथ बंटाते हैं वे बड़े होकर संकट के समय जैसे अकेले रहने पर या किसी इमरजेंसी में दूसरों के मुकाबले मानसिक रूप से ज्यादा मजबूत और शांत रहते हैं।
बेटों को जिम्मेदार स्वावलंबी और भविष्य में एक बेहतरीन पार्टनर बनाने के लिए उन्हें ये 5 बुनियादी आदतें सिखाना बेहद जरूरी है:
बुनियादी कुकिंग की समझ :
हर लड़के को कम से कम अपने लिए बेसिक खाना बनाना जैसे चाय मैगी चावल दाल या रोटी बनाना जरूर आना चाहिए। आज के समय में कुकिंग सिर्फ एक काम नहीं बल्कि एक सुपरपावर है। यह हुनर तब सबसे ज्यादा काम आता है जब वे पढ़ाई या नौकरी के सिलसिले में घर से दूर अकेले रहते हैं।
कपड़ों की देखभाल और लॉन्ड्री डे :
केवल बाहर के काम ही नहीं बल्कि अपने कपड़े खुद धोना उन्हें सुखाना और सलीके से तय करके अलमारी में रखना भी लड़कों को आना चाहिए। इससे उनमें अपनी चीजों को संभालने की जिम्मेदारी आती है और वे संडे लॉन्न्ड्री डे को बोझ नहीं बल्कि अपनी लाइफस्टाइल का हिस्सा मानने लगते हैं।
अपने कमरे को व्यवस्थित रखना:
अक्सर लड़के अपना कमरा बिखरा हुआ छोड़ देते हैं। उन्हें बचपन से ही अपना बिस्तर खुद ठीक करने किताबों और सामानों को सही जगह पर रखने की आदत डालनी चाहिए। एक साफ कमरा न केवल अनुशासन सिखाता है बल्कि फोकस और क्रिएटिविटी को भी बढ़ाता है।
घरेलू बजट और कामकाज में हाथ बंटाना:
घर की सफाई राशन का सामान लाना या घर के छोटे-मोटे रख-रखाव के कामों में रुचि लेना जरूरी है। इसके साथ ही लड़कों को घर के बजट और हिसाब-किताब की समझ भी दें। जब बेटे इन कामों में मदद करते हैं तो वे परिवार के प्रति अधिक जिम्मेदार बनते हैं।
अपना बैग और सामान खुद पैक करना:
चाहे स्कूल जाना हो कॉलेज या फिर दोस्तों के साथ किसी ट्रिप पर लड़कों को अपना बैग खुद तैयार करना चाहिए। दूसरों पर निर्भर रहने के बजाय अपनी जरूरत का सामान खुद याद रखकर पैक करने से उनका आत्मविश्वास और टाइम मैनेजमेंट बेहतर होता है।
बेटों को ये काम सिखाने के लिए उन पर दबाव न बनाएं। इसकी शुरुआत घर में एक नो-गैजेट कुकिंग डे या क्लीनिंग चैलेंज रखकर एक गेम की तरह की जा सकती है। ये बुनियादी आदतें न केवल बेटों को एक जिम्मेदार और समझदार इंसान बनाती हैं बल्कि भविष्य में उनके पार्टनर के साथ एक मजबूत खुशहाल और बराबरी का रिश्ता बनाने में भी मदद करती हैं।
-हेमलता शर्मा, जयपुर
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