
बाजार की पाठशाला : रिटायरमेंट के बाद पैसिव इनकम से सुरक्षित करें अपना भविष्य
नई दिल्ली। जीवन के दूसरे पड़ाव यानी रिटायरमेंट में प्रवेश करते समय सबसे बड़ी चिंता नियमित आय के बंद होने की होती है। नौकरी के दौरान हर महीने मिलने वाली सैलरी जहां खर्चों को आसान बनाती है, वहीं रिटायरमेंट के बाद वही खर्चे पहाड़ जैसे लगने लगते हैं। इसी वित्तीय अनिश्चितता को दूर करने का एकमात्र सशक्त समाधान पैसिव इनकम है। पैसिव इनकम वह कमाई है जिसके लिए आपको शारीरिक रूप से रोज काम नहीं करना पड़ता, बल्कि आपकी जमा पूंजी आपके लिए काम करती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, एक सुखी सेवानिवृत्त जीवन के लिए आय के एक से अधिक स्रोतों का होना अनिवार्य है।
रिटायरमेंट के बाद सुरक्षित निवेश के लिए सीनियर सिटिजन सेविंग्स स्कीम (SCSS) पहली पसंद बनी हुई है। इसमें वर्तमान में 8.2 प्रतिशत की आकर्षक ब्याज दर मिलती है और निवेश की अधिकतम सीमा 30 लाख रुपए है। इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह सरकारी गारंटी के साथ आता है और हर तिमाही ब्याज का भुगतान सीधे निवेशक के खाते में कर देता है।
इसी तरह, पोस्ट ऑफिस मासिक आय योजना (MIS) भी उन वरिष्ठ नागरिकों के लिए वरदान है जो बाजार के जोखिम से दूर रहना चाहते हैं। इसमें जॉइंट अकाउंट के जरिए 15 लाख रुपए तक निवेश कर हर महीने एक निश्चित आय सुनिश्चित की जा सकती है।
जो लोग रियल एस्टेट में रुचि रखते हैं, उनके लिए रेंटल इनकम (किराया) पैसिव आय का एक सदाबहार जरिया है। फ्लैट या दुकान को किराए पर देकर न केवल मासिक नकदी प्रवाह बना रहता है, बल्कि समय के साथ संपत्ति की कीमत भी बढ़ती है।
वहीं, निवेश के आधुनिक तरीकों में डिविडेंड यील्ड स्टॉक्स और म्यूचुअल फंड उन लोगों के लिए बेहतर हैं जो महंगाई को मात देने वाला रिटर्न चाहते हैं। ये कंपनियां अपने मुनाफे का एक हिस्सा शेयरधारकों को देती हैं, जो नियमित अंतराल पर आय का स्रोत बन जाता है। अंत में, एन्युटी प्लान (पेंशन योजनाएं) उन लोगों के लिए सबसे उपयुक्त हैं जो जीवनभर के लिए एक तय पेंशन की गारंटी चाहते हैं। इन सभी विकल्पों का सही तालमेल न केवल आर्थिक बोझ कम करता है, बल्कि रिटायरमेंट के बाद भी वित्तीय आजादी सुनिश्चित करता है।






