बाजार की पाठशाला : शेयर बाजार में बल्क डील और ब्लॉक डील क्या होती है, निवेशकों के लिए जानना जरूरी

बाजार की पाठशाला : शेयर बाजार में बल्क डील और ब्लॉक डील क्या होती है, निवेशकों के लिए जानना जरूरी

मुंबई। शेयर बाजार में निवेश करने वाले निवेशकों के लिए अक्सर बल्क डील और ब्लॉक डील जैसे शब्द खबरों में सुनाई देते हैं। कई बार किसी स्टॉक में अचानक तेजी या गिरावट की वजह भी इन्हीं डील्स से जुड़ी होती है। ऐसे में निवेशकों के लिए यह समझना बड़ा ही जरूरी हो जाता है कि आखिर बल्क डील और ब्लॉक डील क्या होती हैं, इनमें फर्क क्या है, और शेयर बाजार में इनका क्या महत्व होता है। 

जब किसी शेयर में किसी एक निवेशक या संस्था द्वारा कुल जारी शेयरों का कम से कम 0.5 प्रतिशत या उससे अधिक की खरीद या बिक्री एक ही दिन में की जाती है, तो उसे बल्क डील कहा जाता है। यह डील सामान्य ट्रेडिंग सेशन के दौरान ही होती है और इसका असर उस शेयर की कीमत पर तुरंत दिखाई देता है। अगर कोई बड़ा निवेशक किसी कंपनी में भरोसा दिखाते हुए भारी मात्रा में शेयर खरीदता है, तो अक्सर रिटेल निवेशकों का भरोसा भी बढ़ता है। 

जबकि, ब्लॉक डील शेयर बाजार की एक खास व्यवस्था के तहत होती है। इसमें कम से कम 5 लाख शेयर या 5 करोड़ रुपए से अधिक की डील की जाती है। यह डील स्टॉक एक्सचेंज द्वारा तय किए गए खास समय में होती है, जिसे ब्लॉक डील विंडो कहा जाता है। ब्लॉक डील का मकसद यह होता है कि बड़े सौदे बाजार को ज्यादा प्रभावित किए बिना पूरे किए जा सकें। इसमें खरीदार और विक्रेता पहले से तय होते हैं। 

जानकारों के मुताबिक, बल्क डील आम ट्रेडिंग सेशन में होती है और इसकी जानकारी दिन के अंत में सामने आती है, जबकि ब्लॉक डील एक निर्धारित समय में होती है और इसकी सूचना तुरंत सार्वजनिक कर दी जाती है। बल्क डील में शेयरों की संख्या या रकम की सीमा कम होती है, जबकि ब्लॉक डील बड़े निवेशकों के लिए बनाई गई व्यवस्था है, जिसमें रकम और शेयरों की संख्या काफी ज्यादा होती है। शेयर बाजार में मुख्य रूप से चार तरह की डील देखने को मिलती हैं। 

पहली, सामान्य ट्रेडिंग डील, जिसमें रोजाना निवेशक शेयर खरीदते और बेचते हैं। दूसरी, बल्क डील, जिसमें बड़ी मात्रा में शेयरों का लेनदेन होता है। तीसरी, ब्लॉक डील, जो खास विंडो के जरिए बड़े सौदों के लिए की जाती है। चौथी, ऑफ-मार्केट डील, जिसमें शेयरों का ट्रांसफर स्टॉक एक्सचेंज के ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के बाहर किया जाता है, जैसे प्रमोटर्स के बीच शेयरों का ट्रांसफर। 

एक्सपर्ट्स का कहना है कि बल्क डील और ब्लॉक डील के बारे में जानकारी होने से निवेशकों को यह संकेत मिलता है कि किसी कंपनी में बड़े निवेशक क्या रुख अपना रहे हैं। हालांकि, सिर्फ इन डील्स के आधार पर निवेश का फैसला करना सही नहीं होता है। निवेशकों को कंपनी के फंडामेंटल्स, रिजल्ट्स और भविष्य की संभावनाओं को भी जरूर देखना चाहिए। ये दोनों डील्स शेयर मार्केट की अहम गतिविधियां हैं, जो बाजार की दिशा और किसी स्टॉक की चाल को प्रभावित कर सकती हैं। -आईएएनएस

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