
स्कूल खुलने से पहले बच्चों का स्क्रीन टाइम कम करने के जादुई तरीके
गर्मियों की छुट्टियां खत्म होने की कगार पर हैं और जल्द ही स्कूलों की घंटी बजने वाली है। इस बीच लगभग हर घर में माता-पिता एक ही बड़ी चुनौती से जूझ रहे हैं और वह है बच्चों को मोबाइल की लत से दूर करना। छुट्टियों के दौरान देर रात तक रील्स देखना वीडियो गेम्स खेलना और यूट्यूब शॉर्ट्स स्क्रॉल करना बच्चों की दिनचर्या बन चुका है। अब जब दोबारा स्कूल जाने का समय आ गया है, तो सुबह-शाम बच्चों के हाथ से फोन छीनने के लिए घरों में झगड़े शुरू हो गए हैं।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस समस्या का समाधान बच्चों को डांटने या उन पर गुस्सा करने में नहीं है। बच्चों की इस आदत को बिना किसी ड्रामे या तनाव के बदलने के लिए माता-पिता को कुछ स्मार्ट और व्यावहारिक तरीके अपनाने होंगे। आइए जानते हैं उन जादुई ट्रिक्स के बारे में जो बच्चों को बिना चिड़चिड़े किए वापस किताबों और खिलौनों की दुनिया में ले आएंगी।
डिजिटल डिटॉक्स के बजाय अपनाएं डिजिटल टेपरिंग
बच्चों से अचानक फोन छीन लेना कोई समझदारी नहीं है क्योंकि कोई भी आदत एक झटके में नहीं छूटती। अगर बच्चा दिन में चार घंटे स्क्रीन देख रहा है, तो आज ही उसे सीधे जीरो पर लाने की कोशिश न करें। इसके लिए सबसे बेहतर तरीका यह है कि आप हर दिन उसके स्क्रीन टाइम को 20 से 30 मिनट कम करना शुरू करें। धीरे-धीरे समय घटाने की इस प्रक्रिया से बच्चा बिना किसी मानसिक तनाव या गुस्से के सामान्य रूटीन पर वापस आ जाएगा।
सोने से पहले नो स्क्रीन रूल
स्कूल शुरू होने का सीधा मतलब है सुबह जल्दी उठना और इसके लिए रात को समय पर सोना जरूरी है। मोबाइल से निकलने वाली ब्लू लाइट बच्चों की नींद के हार्मोन को बिगाड़ देती है जिससे उनकी सुबह की ऊर्जा प्रभावित होती है। नियम बनाएं कि सोने के ठीक एक घंटे पहले घर के सभी गैजेट्स को पूरी तरह बंद करके एक निश्चित चार्जिंग स्टेशन पर रख दिया जाएगा। शुरुआत में बच्चे थोड़ा बोरियत महसूस करेंगे लेकिन धीरे-धीरे उनकी स्लीप साइकिल बिल्कुल ठीक हो जाएगी।
घर में बनाएं स्क्रीन फ्री ज़ोन
लाइफस्टाइल में बदलाव लाने के लिए घर के भीतर कुछ नियमों को सख्ती से लागू करना बेहद जरूरी है। इसके लिए आप घर में स्क्रीन फ्री ज़ोन और स्क्रीन फ्री टाइम तय कर सकते हैं। उदाहरण के लिए डाइनिंग टेबल पर खाना खाते समय और बेडरूम में सोने जाते समय मोबाइल का इस्तेमाल पूरी तरह बैन होना चाहिए। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जब परिवार के सभी बड़े सदस्य इस नियम का ईमानदारी से पालन करेंगे तो बच्चे भी इसे बेहद आसानी से स्वीकार कर लेंगे।
बोरियत को रचनात्मकता में बदलें
अक्सर जैसे ही बच्चा कहता है कि वह बोर हो रहा है माता-पिता काम की व्यस्तता के कारण उसके हाथ में फोन थमा देते हैं। यह आदत सबसे ज्यादा नुकसानदेह है। बच्चे को थोड़ा बोर होने दें क्योंकि बोरियत ही रचनात्मकता को जन्म देती है। जब बच्चों के पास स्क्रीन का विकल्प नहीं होगा तो वे खुद-ब-खुद अपनी पुरानी कॉमिक्स उठाएंगे पेंटिंग करेंगे । लेगो ब्लॉक्स से खेलेंगे या साइकलिंग करने बाहर जाएंगे। आप उन्हें लूडो स्क्रैबल या कैरम जैसे मजेदार बोर्ड गेम्स भी लाकर दे सकते हैं।
खुद बनें बच्चों के रोल मॉडल
बच्चे कभी भी वह नहीं सीखते जो हम उन्हें सिखाने की कोशिश करते हैं बल्कि वे वही करते हैं जो वे हमें करते हुए देखते हैं। अगर आप खुद ऑफिस से आने के बाद घंटों फोन पर रील्स स्क्रॉल कर रहे हैं तो बच्चा आपकी बात कभी नहीं सुनेगा। जब आप बच्चों के साथ घर पर हों तो अपना फोन साइलेंट पर रखें और उन्हें अपना क्वालिटी टाइम दें।
स्कूल खुलने में अब बेहद कम दिन बचे हैं इसलिए आज ही से इन ट्रिक्स को आजमाना शुरू कर दीजिए। स्क्रीन टाइम कम करने की इस प्रक्रिया को कोई सजा मत बनाइए बल्कि इसे एक मजेदार खेल की तरह खेलिए। जो बच्चा पूरे हफ्ते इन नियमों का पालन करे उसे वीकेंड पर उसकी पसंद की कोई डिश बनाकर या पार्क ले जाकर रिवॉर्ड जरूर दें।
हेमलता शर्मा जयपुर
#क्या देखा अपने उर्वशी रौतेला का गॉर्जियास अवतार





