31 जनवरी का पंचांग : माघ मास की त्रयोदशी तिथि, नोट कर लें शुभ मुहूर्त

31 जनवरी का पंचांग : माघ मास की त्रयोदशी तिथि, नोट कर लें शुभ मुहूर्त

नई दिल्ली। सनातन धर्म में किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत से पहले पंचांग के अनुसार तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण का ध्यान रखना आवश्यक है। 31 जनवरी को माघ मास की शुक्ल पक्ष त्रयोदशी तिथि रहेगी, जो सुबह 8 बजकर 25 मिनट तक प्रभावी है। इसके बाद चतुर्दशी तिथि शुरू होकर 1 फरवरी सुबह 5 बजकर 52 मिनट तक चलेगी। दिन शनिवार है, जो भगवान शनिदेव, महादेव और श्रीराम के परम भक्त हनुमान की आराधना के लिए विशेष रूप से उत्तम माना जाता है। 

शनिवार को हनुमान चालीसा, सुंदरकांड पाठ या हनुमान और शनिदेव की विधि-विधान से पूजा करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। शनिदेव और भगवान शिव की उपासना इस दिन फलदायी सिद्ध होती है। दृक पंचांग के अनुसार, शनिवार को चंद्रमा मिथुन राशि में गोचर करेंगे। 

नक्षत्र पुनर्वसु रहेगा, जो रात 1 बजकर 34 मिनट तक रहेगा, उसके बाद पुष्य नक्षत्र शुरू होगा। योग विष्कम्भ सुबह 1 बजकर 33 मिनट तक रहेगा। करण तैतिल सुबह 8 बजकर 25 मिनट तक प्रभावी है। सूर्योदय 7 बजकर 10 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 5 बजकर 59 मिनट पर होगा। 

शुभ मुहूर्त की बात करें तो ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5 बजकर 24 मिनट से 6 बजकर 17 मिनट तक, अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 13 मिनट से 12 बजकर 56 मिनट तक, विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 23 मिनट से 3 बजकर 6 मिनट तक रहेगा। अमृत काल रात 11 बजकर 21 मिनट से 12 बजकर 49 मिनट तक और रवि योग सुबह 7 बजकर 10 मिनट से रात 1 बजकर 34 मिनट तक रहेगा। इन समयों में पूजा-पाठ, ध्यान या नए कार्य शुरू करना शुभ फलदायी होता है। 

वहीं, अशुभ समय का विचार भी महत्वपूर्ण है। राहुकाल सुबह 9 बजकर 52 मिनट से 11 बजकर 14 मिनट तक रहेगा, जिसमें कोई शुभ कार्य नहीं करना चाहिए। यमगण्ड दोपहर 1 बजकर 56 मिनट से 3 बजकर 17 मिनट तक रहेगा। शनिवार होने के कारण विशेष रूप से श्रीराम भक्त हनुमान, शनिदेव और महादेव की पूजा-अर्चना करना विशेष रूप से फलदायी होता है। इसके लिए सूर्योदय के समय सूर्य को अर्घ्य दें और शाम को गोधूलि मुहूर्त में दीपक जलाकर घर में सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखें। 

शनिदेव को सरसों का तेल, काला तिल, नीला फूल और गुड़ चढ़ाएं। वहीं, महादेव को भी शिवलिंग पर तिल और गुड़ मिश्रित जल चढ़ाने के साथ ही श्रीराम भक्त को चना गुड़ चढ़ाना लाभदायी होता है। इससे रोग-दोष की मुक्ति और भगवन की कृपा मिलती है। 


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