सिर्फ दूध और नींद नहीं बच्चों की हाइट रोक रही हैं पैरेंट्स की ये 5 मॉर्डन गलतियां क्या आप भी कर रहे हैं ये अनजानी भूल

सिर्फ दूध और नींद नहीं बच्चों की हाइट रोक रही हैं पैरेंट्स की ये 5 मॉर्डन गलतियां क्या आप भी कर रहे हैं ये अनजानी भूल

​आजकल हर माता-पिता अपने बच्चे की अच्छी ग्रोथ और लंबाई को लेकर फिक्रमन्द रहते हैं। जब भी हाइट की बात आती है तो डॉक्टर अक्सर टाइम पर सोने हरी सब्जियां खाने और दूध पीने की सलाह देते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि बदलते लाइफस्टाइल में कुछ ऐसी मॉर्डन और हिडन गलतियां हैं जिन पर हमारा ध्यान ही नहीं जाता और वो चुपके से बच्चे के ग्रोथ हार्मोन्स को ब्लॉक कर देती हैं। चाइल्ड स्पेशलिस्ट्स और हालिया रिसर्च के अनुसार ये हैं वो 5 चौंकाने वाली कमियां जिन्हें आपको तुरंत सुधारना चाहिए।

​स्क्रीन टाइम का ब्लू लाइट अटैक सिर्फ देर से सोना ही विलेन नहीं है
​हम अक्सर सोचते हैं कि बच्चा 10 बजे सो गया तो नींद पूरी हो गई। लेकिन असली खेल मेलाटोनिन नाम के हार्मोन का है। अगर बच्चा सोने से ठीक पहले मोबाइल या टीवी देख रहा है तो स्क्रीन की ब्लू लाइट दिमाग को धोखा देती है कि अभी दिन है। इससे गहरी नींद नहीं आती। याद रखें बच्चे की हाइट बढ़ाने वाला ह्यूमन ग्रोथ हार्मोन सिर्फ और सिर्फ गहरी नींद के दौरान ही रिलीज होता है। नया नियम यह है कि सोने से कम से कम 1 घंटा पहले नो स्क्रीन गैप अपनाएं।

हेल्दी समझकर पिलाए जाने वाले पैकेट बंद जूस और माल्ट ड्रिंक्स
​पैरेंट्स को लगता है कि वो बच्चे को बाजार का हेल्थ ड्रिंक या फ्रूट जूस देकर ताकत दे रहे हैं। लेकिन ये असल में शुगर बम हैं। जब बच्चा ज्यादा रिफाइंड शुगर लेता है, तो शरीर में इंसुलिन का लेवल अचानक बढ़ जाता है। मेडिकल साइंस कहता है कि इंसुलिन का बढ़ा हुआ स्तर सीधे तौर पर ग्रोथ हार्मोन के काम को रोक देता है। नया नियम यह है कि पैकेट वाले दूध के सप्लीमेंट्स की जगह असली नट्स जैसे बादाम अखरोट का पाउडर और साबुत फल दें।

​सिटिंग डिजीज और सनस्क्रीन की अति
​आजकल के बच्चे बाहर खेलने के बजाय घर में ही एक जगह बैठकर वीडियो गेम खेलते हैं या पढ़ाई करते हैं। इसे डॉक्टर सिटिंग डिजीज कहते हैं। जब तक पैर सीधे नहीं होंगे और उन पर नेचुरल प्रेशर दौड़ने या कूदने से नहीं पड़ेगा तब तक हड्डियों की ग्रोथ प्लेट्स एक्टिव नहीं होतीं। इसके अलावा हर वक्त सनस्क्रीन लगाकर रखना या धूप से बचाना विटामिन डी3 की भारी कमी कर रहा है, जिसके बिना कैल्शियम हड्डियों में एब्जॉर्ब हो ही नहीं सकता। नया नियम यह है कि बच्चे को रोज कम से कम 30 से 45 मिनट ऐसी फिजिकल एक्टिविटी कराएं जिसमें उछलना कूदना जैसे बास्केटबॉल या रस्सी कूदना शामिल हो।

​भारी स्कूल बैग और गलत पोस्चर
​यह एक ऐसा फैक्टर है जिसे अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं। बचपन में बच्चों की रीढ़ की हड्डी बहुत लचीली होती है। रोज अपनी क्षमता से ज्यादा भारी स्कूल बैग उठाने और लगातार झुककर बैठने या मोबाइल देखने से रीढ़ की हड्डी का नेचुरल अलाइनमेंट बिगड़ जाता है। इससे बच्चा अपनी वास्तविक लंबाई से कम दिखने लगता है और उसकी रीढ़ की हड्डी का विकास भी प्रभावित होता है। नया नियम यह है कि बच्चे के बैठने के पोस्चर पर ध्यान दें और बैग का वजन उसके शरीर के वजन के 10 प्रतिशत से ज्यादा न होने दें।

​मानसिक तनाव और परफॉर्मेंस प्रेशर
​जी हां तनाव सिर्फ बड़ों को नहीं होता है। पढ़ाई मार्क्स और कॉम्पिटिशन का प्रेशर बच्चों के शरीर में कोर्टिसोल यानी स्ट्रेस हार्मोन को बढ़ा देता है। साइंटिफिक स्टडीज बताती हैं कि क्रोनिक स्ट्रेस यानी लगातार बना रहने वाला तनाव सीधे तौर पर पीयूष ग्रंथि को प्रभावित करता है जिससे हाइट बढ़ाने वाले हार्मोन्स का बनना धीमा पड़ जाता है। नया नियम यह है कि बच्चे को सिर्फ पढ़ाई का रोबोट न बनाएं। उसके साथ हंसने खेलने और खुलकर बात करने का माहौल रखें।
​चाइल्ड स्पेशलिस्ट्स का कहना है कि बच्चे की लंबाई 80 प्रतिशत जेनेटिक्स यानी माता पिता के जीन पर निर्भर करती है, लेकिन बाकी की 20 प्रतिशत ग्रोथ पूरी तरह से उसके लाइफस्टाइल पर टिकी होती है। अगर आप ऊपर बताई गई 5 मॉडर्न गलतियों को सुधार लें तो आपका बच्चा अपनी जेनेटिक क्षमता के अनुसार अपनी मैक्सिमम हाइट हासिल कर सकता है।
हेमलता शर्मा जयपुर

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