
क्या आप माइग्रेन से परेशान हैं तो होम्योपैथी है होलिस्टिक समाधान, दवाओं के साथ आदतों में भी बदलाव जरूरी
हैल्थ डेस्क। जयपुर
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, घंटों स्क्रीन के सामने वक्त बिताना और तनावपूर्ण जीवनशैली ने माइग्रेन को आम लेकिन गंभीर समस्या बना दिया है। जहाँ विश्व स्तर पर योग और प्राकृतिक पद्धतियों को अपनाया जा रहा है, वहीं होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति माइग्रेन के इलाज में अपनी होलिस्टिक अप्रोच (पूर्ण शारीरिक और मानसिक उपचार) के लिए जानी जाती है।
जयपुर के वरिष्ठ होम्यो चिकित्सक डॉ. एन. सी. पंवार बताते हैं कि माइग्रेन कोई साधारण सिरदर्द नहीं है। यह अक्सर सिर के एक हिस्से में तेज धड़कन जैसा दर्द होता है, जिसके साथ जी मिचलाना, उल्टी और रोशनी या शोर के प्रति संवेदनशीलता जैसे लक्षण जुड़े होते हैं। डॉ. पंवार के अनुसार, हर व्यक्ति का माइग्रेन अलग होता है-किसी को धूप से दर्द शुरू होता है, तो किसी को मानसिक तनाव या खाली पेट रहने से।
होम्योपैथी: जड़ पर प्रहार न कि केवल लक्षणों का दमन
डॉ. एन. सी. पंवार बताते हैं कि एलोपैथी में अक्सर पेनकिलर्स के जरिए दर्द को दबाया जाता है, जिसके लंबे समय तक इस्तेमाल से साइड इफेक्ट्स का खतरा रहता है। इसके विपरीत, होम्योपैथी मरीज की मानसिक स्थिति, शारीरिक बनावट और दर्द के ट्रिगर्स (कारणों) को समझकर दवा का चयन करती है।
इन दवाओं से मिल सकती है राहतः
सल्फर और लाइकोपोडियम:
उन लोगों के लिए प्रभावी हो सकती हैं जिन्हें खान-पान की गड़बड़ी या पेट की समस्याओं के कारण माइग्रेन होता है।
नेट्रम म्यूर:
यह अक्सर उन मरीजों को दी जाती है जिनका माइग्रेन तेज धूप या मानसिक तनाव के कारण बढ़ जाता है।
बैलाडोना:
अचानक उठने वाले तेज और धड़कन वाले दर्द में राहत पहुँचाने के लिए जानी जाती है।
ग्लोनोनियम:
गर्मी या लू लगने के कारण होने वाले माइग्रेन के लिए रामबाण मानी जाती है। लेकिन कोई भी दवा केवल योग्य चिकित्सक की सलाह पर ही लेनी चाहिए।
क्यों प्रभावी है होम्योपैथी?
डॉ. एन. सी. पंवार के अनुसार, होम्योपैथिक दवाएं शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Vital Force) को सक्रिय करती हैं। यह न केवल दर्द की तीव्रता को कम करती हैं, बल्कि माइग्रेन के दौरों की आवृत्ति को भी धीरे-धीरे खत्म कर देती हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि ये दवाएं पूरी तरह सुरक्षित हैं और इनकी आदत नहीं पड़ती।
सावधानियां और जीवनशैलीः
होम्योपैथी विशेषज्ञ डॉ. पंवार का मानना है कि उपचार तब और भी प्रभावी हो जाता है जब मरीज अपनी जीवनशैली में सुधार करेः- जैसे कि समय पर सोएं और कम से कम 7-8 घंटे की नींद लें। शरीर में पानी की कमी न होने दें। अगर कॉफी, तेज गंध या खास तरह के भोजन से दर्द होता है, तो उनसे बचें।
आयुष मंत्रालय की सलाह के अनुसार भी प्राणायाम और योगासन के साथ होम्योपैथी का मेल माइग्रेन को स्थायी रूप से विदा करने में मददगार साबित हो सकता है। माइग्रेन से मुक्ति पाने के लिए केवल दर्द को दबाना काफी नहीं है। होम्योपैथी और एक अनुशासित जीवनशैली का संगम आपको इस पीड़ा से लंबी राहत दिला सकता है। यदि आप भी बार-बार होने वाले सिरदर्द से परेशान हैं, तो किसी अनुभवी होम्योपैथ से परामर्श जरूर करें।
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