करेंगे इन बातों पर गौर तो बनी रहेगी रिश्तों में मधुरता और ...

करेंगे इन बातों पर गौर तो बनी रहेगी रिश्तों में मधुरता और ...

हमारे पड़ोस में तीन युवा भाईयों ने अपनी कमाई और परिवार के सहयोग से एक बड़ा सा मकान बनाया। मकान बनाने के कुछ ही महीनों बाद तीनों भाई उस मकान में रहने लगे और लगभग एक महीने बाद ही हमें उस घर में उनके साथ एक युवा लडक़ी दिखाई दी। पहनावे से वो शादीशुदा लग रही थी। तीन भाईयों में सबसे बड़े भाई ने एक दिन हमारे घर की घंटी बजाई और बोला अंकल मुझे आपसे और आंटी से बात करनी है। अन्दर आने पर उसने मेरी पत्नी के हाथ में मिठाई का डिब्बा देते हुए कहा कि आंटी मेरी शादी हो गई है और जिस लडक़ी को आप मेरे घर में देख रहे हैं वह मेरी पत्नी है। हम दोनों ने अपने परिवार वालों की सहमति से प्रेम विवाह किया है।

अभी इस बात को बीते छह महीने भी नहीं हुए थे कि हमें एक दिन उनके घर से जोर-जोर से रोने और चिल्लाने की आवाज आई जिस गली में हम रहते हैं वहाँ सिर्फ आठ मकान बने हुए हैं और शेष 8 खाली प्लॉट हैं। फिर यह क्रम कमोबेश हर तीसरे-चौथे दिन होने लगा। आखिर एक दिन हमने देखा वो लडक़ी अपनी माँ के साथ कैब में बैठ कर अपने सामान के साथ चली गई। बीती दीपावली के बाद पता चला कि दोनों ने तलाक का मुकदमा दायर कर दिया है। न चाहते हुए भी लडक़े से मेरी पत्नी ने इसका कारण पूछा तो उसने कहा कि मोनिका मेरे प्रति बहुत ही ज्यादा पजेसिव थी, इसके चलते मेरी निजी जिन्दगी प्रभावित हो रही थी। उसका कहना था कि मोनिका चाहती थी कि मैं सिर्फ और सिर्फ उससे बात करूं, उसका ध्यान रखूं। शुरू-शुरू में तो यह सब अच्छा लग रहा था लेकिन धीरे-धीरे मैंने महसूस किया कि मेरी अपनी कोई जिन्दगी नहीं रही है। जैसा वो चाहती थी वैसा मैं कर रहा था। उसे समझाने का प्रयास किया लेकिन नतीजा आज सबके सामने है।

कमोबेश हर घर में ऐसा ही देखने को मिल रहा है। हर पत्नी चाहती है कि उसका पति सिर्फ उसका हो वो किसी और से कोई रिश्ता न रखे। यह सम्भव नहीं हो पाता है। पुरुष यदि एक का होकर रह गया तो उसकी जिन्दगी नहीं चल सकती है। उसे अपनी पत्नी के अतिरिक्त अपने अन्य रिश्तों को बनाकर रखना होता है। वैसे भी महिलाओं से ज्यादा रिश्तों को पुरुष निभाते हैं।

पजेसिव (अर्थात् अंकुश अर्थात् ध्यान रखना, लगाम कसना) होना अच्छी बात है, लेकिन दाम्पत्य जीवन में जब कोई साथी चाहे वह पुरुष हो या महिला अपने साथी के प्रति ज्यादा पजेसिव हो जाता है, तो रिश्ता खराब हो जाता है। इस तरह से रिश्ते में रहते हुए दम घुटने लगता है और फिर हमें आजादी की जरूरत महसूस होती है। पुरुषों और महिलाओं दोनों में पजेसिव होने का मुख्य कारण जलन और असुरक्षा की भावना होती है। पजेसिव होने से आपके रिश्ते और साथी दोनों को नुकसान पहुंच सकता है। साथी पर शक करना, जलन महसूस करना या अधिक प्रश्न पूछना पजेसिवनेस के लक्षण हो सकते हैं। आपका आपके साथी के रिश्ता प्यार और सम्मान का होता है इसमें आसानी से दरार आ सकती है, इसलिए रिश्ता खराब होने से पहले खुद को नियंत्रित करने का प्रयास करते हुए एक नई शुरूआत करें।

सामान्य तौर पर साथी के साथ रहना और एक अंकुश रखने वाले या अतिरिक्त ध्यान रखने वाले साथी के साथ रहना दोनों में काफी अंतर होता है। जब रिश्ते में असुरक्षा और जलन की बात आ जाती है, तो कपल्स अक्सर प्यार से लेकर पजेसिवनेस की सीमा को पार कर जाते हैं। ऐसे में कपल्स एक-दूसरे की आंतरिक स्वतंत्रता का अनादर करते हैं और एक-दूसरे की जिंदगी में दखल देने लगते हैं। पजेसिवनेस के चलते कपल्स एक-दूसरे के फोन और दोस्तों के माध्यम से सीक्रेट पता लगाते हैं और अविश्वास मिलने पर गुस्सा हो जाते हैं। कई बार ऐसी चीजों से निपटना काफी मुश्किल हो जाता है।

गुजरे वक्त और पलों को याद न करें
कई बार अतीत में मिला धोखा या झूठ नए रिश्तों को बरबाद कर सकता है। नए पार्टनर को शुरुआत में ही अपने पुराने रिश्तों के बारे में सब कुछ बता दें ताकि रिश्ता गहरा होने के बाद किसी तरह का संदेह न रह जाए। जितना हो सके अतीत के बारे में कम सोचें और कम बात करें। नए रिश्ते को इंजॉय करें।

अपनी जिन्दगी जिएं
हर किसी का अपना शौक, नौकरी और सामाजिक जीवन होता है। साथी के साथ समय बिताना अच्छी बात है लेकिन कुछ समय अपनी निजी जिन्दगी को भी देना चाहिए। इससे रिश्ते में नयापन होगा और बात करने के लिए भी कई नए विषय मिलेंगे।


#क्या सचमुच लगती है नजर !