कहीं मैं रिजेक्ट न हो जाऊं

कहीं मैं रिजेक्ट न हो जाऊं

अपने बारे में अपनी राय बदलें-
अगर कोई अपनी बातों से आपको आहत करता है या चोट पहुंचाता है तो इसका अर्थ यह नहीं है कि आप खुद को उसकी नजर से देखने लगें। दूसरों की राय को महत्व देने से पहले यह जानना जरूरी है। कि आपकी अपने बारे में क्या राय है। इनकार के भय को चुनौती मानें। अपने विचारों को वास्तविकता के धरातल पर सोचें तो इस भय को खत्म करने में मदद मिलेगी। भयके बारे में लिखें: जिन चीजों से भय लगता है उन्हें महसूस करें कि यह भय किस स्तर पर है। बेहतर तरीका है कि एक कागज-कलम लेकर लिखें कि भविष्य के बारे में सोचते हुए क्या महसूस करते हैं। यह लिखने के बाद कि कौन सी बात आपको भयग्रस्त करती है अगला कदम यह सोचने का है कि आपके भय कितने वास्तविक हैं। किसी खास घटना या स्थिति में ऎसा लगता है कि भय वास्तविक है लेकिन वह समय गुजरने के बाद वे भय निरर्थक भी लगने लगते हैं। करीबी लोग भी दें सहयोग एक वेवसाइट के सर्वेक्षण के अनुसार करीबी लोगों के प्रयास भी व्यक्ति को इस भय से उबरने में मदद कर सकते हैं-


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