कहीं मैं रिजेक्ट न हो जाऊं

कहीं मैं रिजेक्ट न हो जाऊं

भय के लक्षण
माता-पिता यदि बच्चों की दूसरी से तुलना करने लगें तो उसे लगता है कि वह अच्छा नहीं है। यह बात उसके मन में बैठ जाती है। समय के साथ यह भय फैलता है। व्यक्ति अपने दायरे में सिमटने लगता है वह अपनी भावनाएं शेयर नहीं कर पाता। वह धीरे-धीरे अपना व्यक्तित्व खोने लगता है। वह परफेक्ट व्यक्ति की तरह बोलने-काम करने की कोशिश करता है। वह किसी को न नहीं कह पाता। साथ ही दूसरों को नजदीक लाने से घबराता है। वह अपनी छवि दूसरों के हिसाब से गढनें लगता है। खुद को स्वीकार नहीं पाता।


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