पति-पत्नी की खट्टी-मीठी शिकायते

पति-पत्नी की खट्टी-मीठी शिकायते

बहाना बनाना और बेवकूफ बनाना कोई इनसे सीखे। हमारे रिश्तेदारों के आने की खबर से कब और कहां दर्द हो जाएगा अथवा कौन-सा बाहरी काम निकल आएगा, ब्रना भी नहीं समझ सकते हैं।
इनकी जासूसी और तर्क के आगे तो बडे-बडे जासूस भी गच्चा खा जाएं। कहां, किसके साथ, क्यों, कब का जवाब देते समय सावधान रहना पडता है या फिर बगलवाले शर्माजी तो समय से घर आ गए थे, आपको क्यों देर हुई, रास्ता तो एक ही है।
इनका मायका पुराण या पापा चाहते है, भैया कहते हैं सुन-सुनकर कान पक जाते हैं। यह जिन्दगी का सबसे बोरिंग अध्याय है।


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