वृद्धों की अधिक संख्या समाज को बनाती है धार्मिक

वृद्धों की अधिक संख्या समाज को बनाती है धार्मिक

मोस्को। एक शोध के अनुसार, जैसे-जैसे देश में वृद्धों के अनुपात में बढ़ोतरी होती जाती है, समाज के धार्मिक होने की संभावना उतनी ही बढ़ती जाती है। वृद्धों का ईश्वर के प्रति झुकाव काफी ज्यादा होता है, और अपने इस भरोसे और धर्म को वे अपने बच्चों में संचारित करते हैं।

शोध के अनुसार, जनसंख्या में वृद्धों की संख्या बढ़ने से धर्म से धर्मनिरपेक्ष मूल्यों की ओर बढ़ने की प्रक्रिया धीमी हो सकती है।

साइंटिफिक स्टडी ऑफ रिलीजियन के एक जर्नल में प्रकाशित इस शोध ने भविष्यवाणी की है कि आगामी 20 सालों में कई विकसित देश और भी अधिक धार्मिक बन जाएंगे।

विकसित देशों में वृद्ध व्यक्ति (50 साल से अधिक आयु) वयस्कों (20 साल से अधिक आयु) की जनसंख्या का आधा हिस्सा हैं और साल 2040 तक उनकी संख्या और भी बढ़ जाएगी।

रूस के नेशनल रिसर्च यूनिवर्सिटी हाईयर स्कूल ऑफ इकोनोमिक्स के एंड्रे कोरोटेव इस शोध के लेखकों में से एक हैं। उन्होंने कहा, ऐसे में खासकर विकसित देशों में धर्म से धर्मनिरपेक्ष मूल्यों में परिवर्तन की गति को धीमा करने में वृद्ध व्यक्ति सबसे अधिक प्रभाव डाल सकते हैं, और शायद धर्म वृद्धि में भी वे प्रभावकारी साबित हो सकते हैं।

ऐसा कई बार देखा गया है कि युवाओं की तुलना में वृद्धों का धर्म के प्रति झुकाव ज्यादा होता है।

इस शोध में 16 देशों को शामिल किया गया था, जिनमें आस्ट्रेलिया, अमेरिका, कनाडा, ग्रेट ब्रिटेन, इजरायल, न्यूजीलैंड, जापान, जर्मनी और यूरोपीय देश भी थे।

इस शोध के परिणाम भविष्य के समाज की संरचना का अनुमान लगाने में काफी महत्वपूर्ण साबित होंगे। (आईएएनएस)

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