
Health Tips : आयुर्वेद का अमृत घी हड्डियां मजबूत और तनाव कम करे, चेहरे पर भी लाए निखार
नई दिल्ली। आयुर्वेद में घी को अमृत कहा जाता है, क्योंकि यह शरीर, मन और आत्मा के लिए अत्यंत पौष्टिक और लाभकारी है। मिठाई हो या नमकीन, घी के सेवन से तन-मन दोनों को कई लाभ मिलते हैं।
भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के अनुसार, घी सिर्फ स्वाद बढ़ाने वाला पदार्थ नहीं, बल्कि सेहत के लिए अमृत समान है। पीढ़ियों से भारतीय घरों में इस्तेमाल होने वाला देसी घी आज भी उतना ही खास है, क्योंकि इसमें प्राकृतिक गुणों की भरमार है, जो आधुनिक जीवन की कई समस्याओं का समाधान देता है।
आयुर्वेद कहता है सही समय, सही मात्रा और सही व्यक्ति के लिए घी अमृत है। इसे अपनाकर आप प्राकृतिक तरीके से मजबूत हड्डियां, मजबूत इम्युनिटी और तनाव खत्म कर सकते हैं। वहीं, चमकदार चेहरा भी पा सकते हैं।
आयुर्वेद के अनुसार, घी पाचन अग्नि को तेज करता है, आंतों को चिकना रखता है और पोषक तत्वों के अवशोषण में मदद करता है। यह इम्युनिटी को मजबूत बनाता है, जिससे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और संक्रमण से बचाव होता है। घी में मौजूद विटामिन ए, डी, ई और के हड्डियों को मजबूत करते हैं, जोड़ों की सूजन और दर्द को कम करते हैं। साथ ही ऑस्टियोपोरोसिस जैसी समस्याओं से भी बचाव में कारगर हैं।
आज की व्यस्त और अनियमित दिनचर्या में तनाव और चिंता आम बात बन चुकी है। ऐसे में घी दिमाग को शांत करता है, नींद सुधारता है और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है। यही नहीं घी त्वचा और बालों के लिए भी बेहद फायदेमंद है। इसके नियमित सेवन से त्वचा नरम, चमकदार और जवां रहती है। यह ड्राई स्किन, झुर्रियों और दाग-धब्बों को कम करता है। घी को बाहर से लगाने पर भी त्वचा को गहरा पोषण मिलता है। घी सत्वगुण से भरपूर होने से सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाता है और शरीर से गंदगी को बाहर निकालता है।
आयुर्वेदाचार्य बताते हैं कि रोजाना सुबह खाली पेट गुनगुने पानी या दूध में एक चम्मच घी मिलाकर पिएं। घी को रोटी, सब्जी, दाल या खिचड़ी में थोड़ा डालकर भी खा सकते हैं। रात को सोने से पहले गर्म दूध में घी मिलाकर पिएं, यह तनाव कम करता है और अच्छी नींद लाता है।
हेल्थ एक्सपर्ट के अनुसार घी की मात्रा संतुलित रखें, सामान्य व्यक्ति के लिए 1-2 चम्मच घी रोज काफी है। इससे अधिक मात्रा से कफ बढ़ सकता है। देसी गाय का घी सबसे अच्छा माना जाता है।
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