
सजा नहीं औषधि है उपवास : शरीर को डिटॉक्स करने और नई कोशिकाएं बनाने का प्राकृतिक तरीका
नई दिल्ली। खराब जीवनशैली और असंतुलित खानपान के कारण आज हर दूसरा व्यक्ति पेट की समस्याओं से जूझ रहा है। गैस, एसिडिटी, अपच और भारीपन अब आम बात हो गई है। ऐसे में महंगी दवाओं के पीछे भागने के बजाय आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान दोनों एक बेहद सरल समाधान की ओर इशारा करते हैं और वह है उपवास। उपवास केवल धार्मिक परंपरा नहीं है, बल्कि यह शरीर को अंदर से साफ करने और मरम्मत करने की एक शक्तिशाली जैविक प्रक्रिया है।
पाचन तंत्र की गहरी सफाईः
जब हम उपवास करते हैं, तो हमारे पाचन तंत्र को वह जरूरी विश्राम मिलता है जिसकी उसे सख्त आवश्यकता होती है। लगातार खाते रहने से पेट की मशीनरी थक जाती है। एक निश्चित अंतराल पर भोजन का त्याग करने से शरीर अपनी ऊर्जा का उपयोग पुराने कचरे को बाहर निकालने और अंगों को रिपेयर करने में करने लगता है। यह एक ऐसी प्राकृतिक डिटॉक्स प्रक्रिया है जो कोई भी दवा नहीं कर सकती।
ऑटोफैगी: नई कोशिकाओं का निर्माणः
उपवास के महत्व को अब वैश्विक स्तर पर भी स्वीकार किया जा रहा है। जापानी वैज्ञानिकों द्वारा किए गए शोध के अनुसार, लंबे समय तक भूखा रहने पर शरीर में ऑटोफैगी नामक प्रक्रिया शुरू होती है। इस प्रक्रिया में शरीर की स्वस्थ कोशिकाएं पुरानी, खराब और मृत कोशिकाओं को खाकर उन्हें साफ कर देती हैं और उनकी जगह नई और ऊर्जावान कोशिकाओं का निर्माण होता है। यह शरीर को फिर से जीवंत करने जैसा है, जो उम्र के असर को भी कम करने में मददगार है।
कमजोरी नहीं, ऊर्जा का स्रोतः
अक्सर लोग उपवास के नाम से कमजोरी महसूस करने लगते हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल एक मानसिक भ्रम है। वास्तव में शरीर को मिलने वाली ऊर्जा का बड़ा हिस्सा पानी, हवा और विश्राम से आता है। उपवास शुरू करने के लिए 15 दिन में एक बार एकादशी का समय चुनना सबसे बेहतर है। शुरुआत में केवल शहद मिला पानी, नारियल पानी और ताजे फलों का सीमित सेवन करें। यह याद रखना जरूरी है कि फल केवल ऊर्जा के लिए लें, पेट भरने के लिए नहीं।
सावधानियांः
उपवास के दौरान पर्याप्त पानी पीना अनिवार्य है ताकि शरीर के विषाक्त पदार्थ (Toxins) आसानी से बाहर निकल सकें। हालांकि, गर्भवती महिलाओं, बच्चों और गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोगों को उपवास करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लेनी चाहिए।
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