अपनी खुशियों को दूसरों को न करने दें कंट्रोल, भड़कावे से बचने के तरीके

अपनी खुशियों को दूसरों को न करने दें कंट्रोल, भड़कावे से बचने के तरीके

आज की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में इंसान जितना अपने लिए नहीं सोचता, उतना दूसरों की बातों और राय से प्रभावित हो जाता है। कोई क्या कह रहा है, किसने क्या टिप्पणी कर दी या कौन हमें उकसा रहा है। इन सबका असर हमारी खुशियों पर पड़ने लगता है। कई बार हम बिना सोचे-समझे दूसरों के भड़कावे में आकर ऐसे फैसले ले लेते हैं, जिनका पछतावा बाद में होता है। धीरे-धीरे हमारी खुशी दूसरों के हाथों की कठपुतली बन जाती है। लेकिन सच्चाई यह है कि आपकी भावनाएं और खुशियां सिर्फ आपके कंट्रोल में होनी चाहिए।

हर राय आपकी ज़िंदगी के लिए नहीं होती
सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि हर व्यक्ति की सोच, अनुभव और प्राथमिकताएं अलग होती हैं। कोई भी व्यक्ति जो सलाह दे रहा है, जरूरी नहीं कि वह आपके हालात को पूरी तरह समझता हो। कई बार लोग अपनी कुंठा, जलन या अधूरी इच्छाओं के कारण दूसरों को भड़काते हैं। ऐसे में हर राय को दिल पर लेने के बजाय उसे तर्क की कसौटी पर परखना सीखें। जब आप यह समझ जाते हैं कि हर बात पर प्रतिक्रिया देना जरूरी नहीं, तब आप खुद-ब-खुद भावनात्मक रूप से मजबूत बनने लगते हैं।

तुरंत रिएक्ट करने के बजाय खुद को दें समय
भड़कावे की सबसे बड़ी ताकत होती है आपकी तुरंत प्रतिक्रिया। जैसे ही कोई आपको उकसाता है, गुस्सा या दुख आ जाता है और आप बिना सोचे कुछ कह या कर बैठते हैं। ऐसे समय में खुद को कुछ पल का समय देना बहुत जरूरी होता है। गहरी सांस लें, स्थिति को शांत मन से देखें और सोचें कि आपकी प्रतिक्रिया वाकई जरूरी है या नहीं। जब आप तुरंत रिएक्ट नहीं करते, तो सामने वाले का भड़काने का मकसद खुद ही कमजोर पड़ जाता है।

सीमाएं तय करें और ‘ना’ कहना सीखें

जो लोग बार-बार आपकी भावनाओं से खेलते हैं, उनसे दूरी बनाना जरूरी होता है। हर किसी को यह अधिकार नहीं कि वह आपकी खुशी पर असर डाले। इसके लिए स्पष्ट सीमाएं तय करें और जरूरत पड़ने पर ‘ना’ कहना सीखें। शुरुआत में यह मुश्किल लग सकता है, लेकिन धीरे-धीरे यह आदत आपकी मानसिक सेहत को मजबूत बनाएगी। सीमाएं तय करने से आप खुद को भावनात्मक रूप से सुरक्षित महसूस करते हैं।

खुद की खुशी की जिम्मेदारी खुद लें
अगर आपकी खुशी दूसरों की बातों पर निर्भर है, तो वह स्थायी नहीं हो सकती। अपनी खुशी की जिम्मेदारी खुद लेना सीखें। वो काम करें जो आपको सुकून देते हैं—चाहे वो किताब पढ़ना हो, संगीत सुनना हो या खुद के साथ समय बिताना। जब आप खुद से जुड़ते हैं, तो बाहरी शोर आपको कम प्रभावित करता है। आत्मनिर्भर खुशी ही असली आज़ादी है।

सकारात्मक सोच और आत्मविश्वास बनाएं ढाल

जब आपका आत्मविश्वास मजबूत होता है, तो भड़कावे की बातें आप तक पहुंच ही नहीं पातीं। खुद पर भरोसा रखें और अपनी भावनाओं की कद्र करें। सकारात्मक सोच एक ढाल की तरह काम करती है, जो नकारात्मक लोगों और उनकी बातों से आपकी रक्षा करती है। याद रखें, आपकी खुशी की चाबी किसी और के हाथ में नहीं होनी चाहिए।

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