
गुस्से में रिश्ते की डोर न टूटे जानें भारी झगड़े के बाद पार्टनर का भरोसा फिर से जीतने के 5 अचूक उपाय
रिश्ते में अक्सर छोटी-मोटी बहस या बड़ा झगड़ा होना स्वाभाविक बात है। लेकिन कई बार विवाद के बाद आपसी बातचीत बंद हो जाती है और मन में शक या दूरी पैदा होने लगती है। गुस्से में बोले गए कड़वे शब्द या गलत व्यवहार के कारण रिश्ते की नींव कमजोर पड़ने लगती है। ऐसे में सिर्फ एक औपचारिक माफी मांगने से पुरानी कड़वाहट खत्म नहीं होती। अगर आप भी अपने पार्टनर के साथ हुए झगड़े के बाद रिश्ते में फिर से वही पुराना प्यार और विश्वास लौटाना चाहते हैं तो ये पांच आसान और असरदार तरीके आपकी मदद कर सकते हैं।
अपनी गलती की पूरी जिम्मेदारी लें और सच्चे दिल से माफी मांगें
रिश्ते को सुधारने के लिए अपनी गलती को स्वीकार करना सबसे पहला और जरूरी कदम है। केवल औपचारिकता के लिए सॉरी कहने के बजाय अपनी गलती को समझें और ईमानदारी से माफी मांगें। जब आप पार्टनर को यह अहसास कराते हैं कि आपको अपने गलत व्यवहार या शब्दों पर पछतावा है तो सामने वाले का गुस्सा शांत होने लगता है।
पार्टनर को अपनी भावनाएं संभालने के लिए थोड़ा समय और स्पेस दें
झगड़े के तुरंत बाद सब कुछ पहले जैसा करने की जल्दबाजी न करें। बार-बार कॉल, मैसेज या सफाई देने से स्थिति सुधरने की जगह बिगड़ सकती है। पार्टनर को अपने विचार और भावनाएं शांत करने के लिए थोड़ा समय देना समझदारी है। स्पेस देने का अर्थ दूरी बनाना नहीं बल्कि रिश्ते को संभालने का मौका देना होता है।
झगड़े की मूल वजह को समझकर उसका स्थाई समाधान निकालें
केवल मामले को दबाने के बजाय यह जानने की कोशिश करें कि बहस किस बात पर शुरू हुई थी। क्या पार्टनर को अपनी अनदेखी महसूस हो रही थी या कोई पुरानी बात परेशान कर रही थी। आपस में बैठकर शांत दिमाग से बात करें ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा पैदा न हो।
केवल बातों से नहीं बल्कि अपने व्यवहार से भरोसा कायम करें
विश्वास एक दिन में या केवल बातें करने से वापस नहीं आता। अपने दिए गए वादों को अपने रोजाना के व्यवहार में लागू करके दिखाएं। अगर आपने अपनी आदत बदलने का वादा किया है तो उसे साबित करें। जब पार्टनर देखेगा कि आप रिश्ते को लेकर गंभीर हैं तो उसका भरोसा खुद ब खुद लौटने लगेगा।
बात सुलझने के बाद हर नई बहस में पुरानी बातों को न घसीटें
एक बार जब किसी मुद्दे पर बात पूरी हो जाए और माफी मांग ली जाए तो उसे वहीं खत्म कर दें। हर छोटी-मोटी नई बहस में पुरानी गलतियों को बार-बार दोहराने से रिश्ते के जख्म कभी नहीं भरते। बीते हुए झगड़ों को पीछे छोड़कर आगे बढ़ने से ही रिश्ता मजबूत बनता है।
हेमलता शर्मा जयपुर
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