
क्या आपका बच्चा भी हर बात में कहता है हां जानिए बाल मन पर इसके छिपे प्रभाव और 20 सेकंड का जादुई नियम
जब बच्चा हर बात में हां मिलाने लगे और कभी किसी बात से इंकार न करे तो माता-पिता अक्सर इसे अच्छे संस्कारों का प्रतीक मानकर गर्व महसूस करते हैं। हालांकि बाल मनोविज्ञान के विशेषज्ञों का मानना है कि यह आदत बच्चे के मानसिक विकास के लिए नुकसानदेह साबित हो सकती है। हर बात को चुपचाप स्वीकार करने वाला बच्चा आगे चलकर पीपल प्लीजर बन सकता है जिससे उसमें आत्मविश्वास की कमी और निर्णय लेने की क्षमता में गिरावट देखने को मिलती है।
दूसरों को खुश करने की इस होड़ में बच्चा अपनी पसंद और नापसंद को दबाने लगता है। वह माता-पिता या समाज की नाराजगी के डर से अपने मन की बात नहीं कह पाता। जब बच्चा बिना किसी उत्साह के काम करने लगे या उसकी प्रतिक्रियाएं औपचारिकता मात्र लगने लगें तो यह इमोशनल बर्नआउट या मानसिक थकान का संकेत होता है।
इस स्थिति से निपटने के लिए एक दिलचस्प और प्रभावी तरीका 20 सेकंड का पॉज नियम है। जब भी आप बच्चे से कोई काम करने या निर्णय लेने को कहें तो उसे तुरंत जवाब देने के बजाय 20 सेकंड तक सोचने का समय दें। उससे पूछें कि वह इस बारे में वास्तव में क्या सोचता है। यह छोटी सी गतिविधि बच्चे को अपनी राय पहचानने और उसे बिना किसी डर के व्यक्त करने का अवसर देती है।
माता-पिता को घर में ऐसा माहौल बनाना चाहिए जहां बच्चा शिष्टाचार के साथ तर्क दे सके और अपने विचार रख सके। बच्चे को सही जगह पर ना कहना सिखाना और उसकी व्यक्तिगत सीमाओं का सम्मान करना उसे एक सशक्त और आत्मनिर्भर नागरिक बनाने के लिए बहुत जरूरी है।हेमलता शर्मा जयपुर
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