बहुत नाजुक है सगाई से शादी तक का सफर

बहुत नाजुक है सगाई से शादी तक का सफर

रिश्तों की हद-
हालांकि रिश्ते की हदों को तय करना आपका निजी मामला है और व्यक्ति इा हद को खुद निर्धारित करता है लेकिन इसके निर्धारण में कई बातें अहम होती हैं। हर वो काम जिसे दूसरों को बताने में आप शर्मसार महसूस करें वह आपकी हद के बाहर है। किसी के लिए हाथ पकडना । किसी कि हदें इन बातों से बहुत ऊपर होती है। हदों का निर्धारण व्यक्ति के सामाजिक परिवेश पालन-पोषण शिक्षा आदि बातों पर निर्भर करता है। आज के जमाने में बच्चो को-एजुकेशन में पढते हैं इसलिए लडके-लडकियों का हैंडशेक या इसी तरह की अन्य बातें आम हैं। कई बार हम अपने बच्चों के लिए हदें तय करने लग जाते हैं और इस प्रक्रिया में हम काफी संकीर्ण मानसिकता के हो जाते हैं जो कि गलत है।


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