कपडों से बनी ज्वेलरी

कपडों से बनी ज्वेलरी

महिलाओं के लिए गहने बनाने का काम नित नवीनताओं और रचनात्मकता की मांग करता है। यह चुनौती डिजाइनरों को भी कुछ न कुछ नया करने को उकसाती रहती है। वैसे भी फैशन जगत में नए प्रयोगों की मांग सतत् बनी ही रहती है, तो इस लिहाज से हर तरह के नएपन का स्वागत ही है। ज्वेलरी डिजाइनिंग में ऎसा ही एक प्रयोग है कपडों से बनी "फैब्रिक ज्वेलरी" का। कप़डे और रेशम सुनकर शायद आप इसकी सीमाएं बांधने लगें, लेकिन असल में ये जेवर असीमित रचनात्मकता का परिचायक हैं।
जेवरों को आकार देने वाले इन कपडों या मटेरियल में बनारसी, रेशम तथा सिल्क से लेकर बुटिक और स्क्रीन प्रिंट आदि भी शामिल हैं। डिजाइनर इन मटेरियल से खूबसूरत गहने बुन रहे हैं। यही नहीं हाई सोसायटी पार्टीज से लेकर सामान्य गृहिणियों तक को ये गहने काफ ी पसंद आ रहे हैं। वैसे भी गहने तो हमेशा से çस्त्रयों की पसंद और आकर्षण का केंद्र रहे ही हैं...फि र इनका ट्रेडिशनल और यूनिक टच इन्हें और अनूठा बना देता है।
इस तरह के जेवरों में बेस कपडे के मटेरियल से बनाया जाता है और फि र इन पर कुंदन, मोती, स्टोन्स, जरदोजी, माणिक, चांदी या सोने के तार आदि से काम किया जाता है, साथ ही लेस, सैटिन तथा मखमल आदि का प्रयोग भी इन्हें सजाने के लिए किया जाता है। इसके अलावा पूरे कपडे पर छोटे-छोटे मोती गूंथकर भी हार या बाजूबंद बनाया जाता है। इस तरह की ज्वेलरी को ट्रेडिशनल और मॉडर्न दोनों तरह की ड्रेसेस के साथ पहनना पसंद किया जा रहा है।
फिल्म अभिनेत्री रेखा अपनी परंपरागत बनारसी या कांजीवरम साडी के साथ इसी तरह की मैचिंग ज्वेलरी खुद ही तैयार करवाती हैं। शायद इसलिए ही इन ज्वेलरी का क्रेज देखते हुए बडे डिजाइनर्स ने भी अब इस क्षेत्र में अपने ब्रांड उतारना शुरू कर दिया है। इन जेवरों में गले के लिए हार या माला, कान के झुमके, चूडियां तथा ब्रेसलेट, बाजूबंद और जू़डा पिन्स तक बनाए जा रहे हैं। ये जेब पर तो हल्के रहते ही हैं, पहनने में भी आरामदायक हैं तथा आकर्षक भी दिखाई देते हैं। यही कारण है कि महिलाओं से लेकर युवतियों तक सभी इन्हें पसंद कर रही हैं। नए डिजाइनर परंपरागत बनारसी, जामा वर्क, कांजीवरम के अलावा जॉर्जेट, प्रिंटेड कॉटन, जूट, शिफ ॉन, टिशू तथा ऑरगेंजा जैसे मटेरियल का प्रयोग भी इन जेवरों में कर रहे हैं।
असल में जॉर्जेट, शिफ ॉन, टिशू तथा ऑरगेंजा जैसे मटेरियल को काटने, प्लेट्स बनाने, लेसर कटिंग करने तथा सरफेस टेक्सरिंग करने के मामले में ज्यादा आसानी होती है और कम समय में ज्यादा गहने बनाए जा सकते हैं। इन गहनों की कीमत इन पर लगे मटेरियल तथा सजावट के सामान के हिसाब से तय होती है। एक सामान्य जेवर की कीमत लगभग 3 हजार रूपए से शुरू हो सकती है ।
 यदि स्वरोस्की क्रिस्टल्स जैसी महंगी चीजों का प्रयोग किया गया है तो कीमत 15-20 हजार रूपए तक भी पहुंच सकती है। साथ ही हैंडवर्क वाले पीसेस भी महंगे हो सकते हैं। हां, एकदम बेसिक जेवर आपको कुछ सौ रूपयों में भी मिल सकते हैं। यह आप पर निर्भर करता है कि आप अपने ऊपर कितना खर्च करने को तैयार हैंक्
कपडों के साथ ही क्रोशिए से बने, बीड्स लगे जेवर भी इस श्रेणी में बनाए जा रहे हैं, वहीं बुटिक तथा स्क्रीन प्रिंट वाले कपडों को भी गहनों की बेस बनाने में काम में लाया जा रहा है। कुल मिलाकर ये गहने रचनात्मकता के साथ ही गहनों के संसार की नई परिभाषा रचने का काम करते हैं।


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