बच्चे हर बात माता-पिता से शेयर नहीं करते, इन संकेतों से समझें उनके मन की बात

बच्चे हर बात माता-पिता से शेयर नहीं करते, इन संकेतों से समझें उनके मन की बात


बच्चे अपने मन की हर बात माता-पिता से शेयर करें, ऐसा जरूरी नहीं है। कई बार उन्हें कोई बात परेशान कर रही होती है, लेकिन वे उसे शब्दों में बताने के बजाय अपने व्यवहार में दिखाने लगते हैं। अचानक चुप रहने लगना, पहले पसंद आने वाली चीजों में दिलचस्पी कम होना या छोटी-सी बात पर जरूरत से ज्यादा गुस्सा करना ऐसे संकेत हो सकते हैं, जिन पर पैरेंट्स को ध्यान देना चाहिए। हर बदलाव को तुरंत परेशानी मान लेना भी सही नहीं है, क्योंकि बच्चों के मूड में बदलाव सामान्य भी हो सकता है। लेकिन अगर कोई व्यवहार लगातार नजर आए, तो उसे नजरअंदाज करने के बजाय प्यार से समझने की कोशिश करनी चाहिए। बच्चे से सवाल करने के साथ-साथ उसे बिना जज किए सुनना जरूरी है, ताकि उसे लगे कि वह अपनी बात सुरक्षित तरीके से माता-पिता के साथ शेयर कर सकता है।
अचानक अपनी पसंद की चीजों से दूर होने लगे बच्चा
अगर बच्चा पहले जिन चीजों को लेकर काफी उत्साहित रहता था, उनमें अचानक उसकी दिलचस्पी कम होने लगे तो इस बदलाव पर ध्यान दें। हो सकता है वह किसी परेशानी, डर या निराशा से गुजर रहा हो और उसे समझ नहीं आ रहा हो कि अपनी बात कैसे बताए। ऐसे में बार-बार यह पूछना कि आखिर हुआ क्या है, बच्चे को और चुप करा सकता है। इसके बजाय उसके साथ उसकी पसंद की कोई गतिविधि करें और सामान्य बातचीत के बीच उसे खुलने का मौका दें। जरूरी नहीं कि बच्चा पहली बार में सब कुछ बता दे। उसे समय और भरोसा देना ज्यादा जरूरी है।
बार-बार नजरें चुराना या बात बदलना
कई बार बच्चे किसी खास विषय पर बात आते ही बातचीत बदलने लगते हैं या सवाल का सीधा जवाब देने से बचते हैं। इसका मतलब हमेशा यह नहीं कि वे कुछ गलत कर रहे हैं। हो सकता है उन्हें डर हो कि माता-पिता नाराज होंगे या उनकी बात को गंभीरता से नहीं लिया जाएगा। ऐसे समय में तुरंत डांटने या शक करने के बजाय शांत रहना बेहतर है। आप उन्हें यह भरोसा दिला सकते हैं कि उनकी बात पहले सुनी जाएगी और उसके बाद ही कोई फैसला लिया जाएगा। जब बच्चे को सवालों के बजाय समझने वाला माहौल मिलता है, तो उसके लिए अपनी भावनाएं साझा करना आसान हो जाता है।
जरूरत से ज्यादा चिड़चिड़ापन दिखाना
अगर बच्चा सामान्य दिनों की तुलना में छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा करने लगे, रोने लगे या जल्दी परेशान हो जाए, तो सिर्फ उसे बदतमीज या जिद्दी कहकर बात खत्म न करें। कई बार बच्चा अपनी परेशानी को सीधे व्यक्त नहीं कर पाता और उसका असर व्यवहार में दिखाई देता है। स्कूल, दोस्ती, पढ़ाई या किसी बदलाव से जुड़ी कोई बात उसके मन में हो सकती है। ऐसे समय में सजा देने के बजाय पहले उसके व्यवहार के पीछे की वजह समझने की कोशिश करें। शांत माहौल में बात करने पर बच्चा धीरे-धीरे बता सकता है कि उसे वास्तव में किस चीज ने परेशान किया।
अपनी छोटी-बड़ी बातें अब सिर्फ दोस्तों से करने लगे
अगर बच्चा पहले घर में दिनभर की छोटी बातें भी बताता था और अब ज्यादातर बातें सिर्फ दोस्तों के साथ शेयर करने लगा है, तो इसे तुरंत दूरी या अवज्ञा न समझें। जैसे-जैसे बच्चे बड़े होते हैं, उनकी निजी दुनिया और दोस्ती का महत्व बढ़ता है। पैरेंट्स को उसकी इस जरूरत का सम्मान करते हुए अपने रिश्ते में भरोसा बनाए रखना चाहिए। हर बात की पूछताछ करने के बजाय कभी-कभी बस यह जताना काफी है कि जब भी उसे किसी चीज पर बात करनी हो, माता-पिता उसके साथ हैं। यह भरोसा बच्चे को जरूरत पड़ने पर वापस आपके पास आने की जगह देता है।
बार-बार कहे कि ‘कुछ नहीं हुआ’, फिर भी व्यवहार बदला हुआ हो
बच्चा अगर बार-बार कहता है कि सब ठीक है, लेकिन उसके सोने, खाने, बातचीत या रोजमर्रा के व्यवहार में लगातार बदलाव दिखाई दे रहा है, तो उसकी बात को पूरी तरह नजरअंदाज न करें। साथ ही बिना वजह डरने या कोई निष्कर्ष निकालने की जरूरत भी नहीं है। कुछ समय उसके व्यवहार को समझें और सही मौके पर प्यार से बातचीत करें। बच्चे को यह महसूस होना चाहिए कि माता-पिता उसकी निगरानी नहीं, बल्कि उसकी परवाह कर रहे हैं। अगर व्यवहार में लगातार या गंभीर बदलाव बने रहें, तो स्कूल काउंसलर या किसी योग्य मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना भी उचित हो सकता है।

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