
अत्यधिक चंचल बच्चों को संभालने के प्रभावी तरीके बाल विशेषज्ञों ने साझा किए महत्वपूर्ण सुझाव
बच्चों का व्यवहार और उनका स्वभाव एक दूसरे से काफी अलग होता है। कुछ बच्चे शांत और गंभीर होते हैं जबकि कुछ बच्चे अत्यधिक सक्रिय और चंचल नजर आते हैं। घर में या बाहर बच्चों की यह अतिरिक्त ऊर्जा कई बार माता पिता के लिए चिंता और परेशानी का कारण बन जाती है। ऐसे बच्चों को संभालना आसान काम नहीं होता है। बच्चों के इस व्यवहार के पीछे उनकी उम्र पारिवारिक माहौल खानपान और शारीरिक ऊर्जा जैसे कई कारक जिम्मेदार होते हैं। बाल रोग विशेषज्ञों का मानना है कि अत्यधिक चंचल या हाइपरएक्टिव बच्चों को सही मार्गदर्शन और सही दिशा देकर उनके स्वभाव में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। इसके लिए विशेषज्ञों ने कुछ बेहद आसान और व्यावहारिक उपाय बताए हैं।
खानपान में बदलाव लाना बच्चों की चंचलता को नियंत्रित करने का पहला कदम माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार अत्यधिक मीठी चीजें जैसे चॉकलेट टॉफी या मिठाइयां बच्चों के शरीर में ग्लूकोज का स्तर अचानक बढ़ा देती हैं। इससे उनमें शारीरिक हलचल और बेचैनी बढ़ जाती है। इसलिए ऐसी चीजों का सेवन कम से कम कराना चाहिए। इसके अलावा चाय और कॉफी जैसे कैफीन वाले पेय पदार्थों से भी बच्चों को दूर रखना जरूरी है।डिजिटल उपकरणों का अत्यधिक प्रयोग भी बच्चों के व्यवहार को प्रभावित करता है। मोबाइल, टीवी और टैबलेट का ज्यादा इस्तेमाल बच्चों के दिमाग को लगातार उत्तेजित रखता है। इससे उनके स्वभाव में चिड़चिड़ापन और चंचलता बढ़ सकती है। माता पिता को चाहिए कि वे बच्चों के स्क्रीन टाइम को सीमित करें और उन्हें अन्य रचनात्मक कार्यों में लगाएं।
अत्यधिक ऊर्जा वाले बच्चों को सही दिशा देना बहुत जरूरी होता है। उन्हें खेलकूद तैराकी या किसी मनपसंद मैदानी खेल में शामिल करना एक बेहतर विकल्प है। शारीरिक गतिविधियों में व्यस्त रहने से उनकी अतिरिक्त ऊर्जा सही जगह इस्तेमाल होती है जिससे उनका मानसिक और बौद्धिक विकास भी बेहतर तरीके से होता है।
बच्चों के दैनिक जीवन में एक नियमित दिनचर्या का होना बेहद आवश्यक है। उनके सोने उठने पढ़ने और खेलने का समय पहले से तय होना चाहिए। एक निश्चित रूटीन से बच्चा खुद को अनुशासित महसूस करता है। इसके साथ ही बच्चों के अच्छे व्यवहार की सराहना करना भी बहुत जरूरी है। जब भी बच्चा कोई अच्छा काम करे तो उसकी प्रशंसा जरूर करें। डांटने के बजाय प्यार और समझदारी से समझाना ज्यादा असरदार साबित होता है।
विशेषज्ञ यह भी स्पष्ट करते हैं कि हर चंचल या एक्टिव बच्चा किसी मानसिक बीमारी से ग्रस्त नहीं होता है। हालांकि अगर बच्चे की यह चंचलता उसके पढ़ाई और सामान्य जीवन को बुरी तरह प्रभावित कर रही हो तो समय पर विशेषज्ञ डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए।
हेमलता शर्मा जयपुर






