प्रसव के पहले और बाद

प्रसव के पहले और बाद

औरत के लिए प्रसव एक तरह से दूसरा जन्म कहा जाता है। आंकडे बताते हैं कि जिन औरतों के मामलों में गर्भावस्था के दौरान सावधानी नहीं बरती जाती, समय पर उनका इलाज नहीं कराया जाता, उन औरतों में प्रसव के दौरान रिस्क बहुत बढ जाता है। इसलिए जरूरत इस बात की है कि सावधानी बरत कर प्रसव को सुखद और सुरक्षित बनाया जाए। गर्भावस्था के दौरान औरतों के शरीर में तमाम तरह के बदलाव होते हैं। अगर समय पर इन बदलावों को डाक्टर से बात करके सलाह ले ली जाए तो प्रसव के दौरान आने वाली बहुत सारी परेशानियों से बचा जा सकता है। विशेषज्ञा कहती हैं कि शरीर में जब भी किसी तरह का कोई संकट आने वाला होता है, उसके कुछ लक्षण पहले दिख जाते हैं। जरूरत इस बात की होती है कि इन लक्षणों को सही ढंग से समझ कर आने वाले संकट का मुकाबला करने के लिए शरीर को तैयार कर लिया जाए। इन लक्षणों को जब नजरअंदाज कर दिया जाता है तो शरीर किसी न किसी गंभीर बीमारी के जाल में फंस जाता है। इसलिए इन लक्षणों को छिपाना नहीं चाहिए और अपने डाक्टर से मिलकर इन पर खुलकर बातचीत करनी चाहिए। अगर डाक्टर उचित समझेगा तो जांच करा कर आने वाली परेशानी को समझ लेगा।


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