अलग-अलग हैं चिंता और डिप्रेशन, एक नजर इनके अन्तर पर

अलग-अलग हैं चिंता और डिप्रेशन, एक नजर इनके अन्तर पर

6. चिंता करते रहने से इंसान बेचैनी महसूस करता है और साथ-साथ लोगों से मिलना-जुलना कर देता है, जिससे उसकी सोशल लाइफ पर खासा प्रभाव पड़ता है। ऐसा ही व्यक्ति डिप्रेशन के दौरान करता है। अवसादग्रस्त व्यक्ति अकेला रहना पसन्द करता है। उसे कोई दूसरा अच्छा नहीं लगता है। वह अपने आसपास दूसरों को देखकर अपने आप में खीझता रहता है। चिंता और डिप्रेशन दोनों ही स्थिति में लोगों का सामाजिक जीवन प्रभावित होता है।

7. जो व्यक्ति चिंताग्रस्त या अवसाद में होता है वह अपनी भावनाओं पर नियंत्रण नहीं कर पाता है। इसके साथ ही वह भावनात्मक रूप से बहुत कमजोर हो जाता है। जिससे वह ज्यादा जुड़ाव महसूस करता है यदि वह उसकी आँखों से दूर हो जाता है तो उसे याद करके रोता है। या फिर वह उस व्यक्ति की ही बातें करता है।

8. अत्यधिक चिंता करने से इंसान पूरा दिन थका हुआ महसूस करता है। चिंता और डिप्रेशन की स्थिति में इंसान में यह लक्षण अलग हो सकता है। डिप्रेशन की स्थिति में शख्स खुद ही कुछ करना नहीं चाहता।

9. चिंता के कारण लोगों को किसी काम को करते समय फोकस करने में दिक्कत हो सकती है। चिंता और डिप्रेशन दोनों में ही इंसान को इस परेशानी का सामना करना पड़ता है।

10. चिंता और डिप्रेशन के कारण इंसान काफी चिड़चिड़ा हो जाता है। इसके कारण लोगों को मशल्स में तनाव रहता है। इंसान पूरी नींद भी नहीं ले पाता है।

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