
बिजी शेड्यूल के बाद भी बच्चों से मजबूत होगी बॉन्डिंग अपनाएं ये 5 मैजिकल रूल
भागदौड़ भरी जिंदगी में वर्किंग पेरेंट्स के लिए काम और परिवार के बीच बैलेंस बनाना एक बड़ी चुनौती बन गया है। अक्सर देखा जाता है कि दिनभर की थकावट के बाद माता-पिता बच्चों को समय तो देते हैं लेकिन उनके साथ वह भावनात्मक जुड़ाव नहीं बन पाता। बाल मनोवैज्ञानिकों के अनुसार बच्चों को आपके पूरे दिन के समय से ज्यादा आपके क्वालिटी टाइम की जरूरत होती है।
अगर आप भी ऑफिस और घर की जिम्मेदारियों के बीच बच्चे के साथ एक मजबूत और सुरक्षित रिश्ता बनाना चाहते हैं तो ये 5 गोल्डन रूल्स आपके बहुत काम आएंगे:
छोटी-छोटी आदतों से बनाएं सुरक्षा का अहसास
बच्चों के साथ रिश्ते की शुरुआत रोजाना की छोटी-छोटी आदतों से होती है। सुबह ऑफिस निकलने से पहले बच्चे को एक प्यार भरी झप्पी दें।
साथ में नाश्ता करने की आदत डालें। रात को सोने से पहले उन्हें कोई मजेदार कहानी सुनाएं या उनके दिनभर का हाल जानें। ये छोटी-छोटी आदतें बच्चे के मन में यह विश्वास जगाती हैं कि उसकी दुनिया पूरी तरह सुरक्षित है।
क्वालिटी टाइम vs क्वांटिटी टाइम: गैजेट्स को रखें दूर
बच्चे के पास सिर्फ शारीरिक रूप से मौजूद होना काफी नहीं हैआपका पूरा ध्यान भी उसी पर होना चाहिए।जब आप बच्चे के साथ हों तो फोन लैपटॉप और टीवी को पूरी तरह दूर रख दें। बच्चे से आंखों में आंखें मिलाकर बात करें।दिनभर में सिर्फ 15-20 मिनट का डिजिटल-फ्री अटेंशन बिना ध्यान दिए बिताए गए घंटों से कई गुना बेहतर असर दिखाता है।
उनके खेल में खुद बच्चा बनें
बच्चों पर अपनी पसंद थोपने के बजाय उन्हें खुद चुनने दें कि वे क्या और कैसे खेलना चाहते है। जब आप उनके साथ खेलें तो पेरेंट न बनकर उनके दोस्त की तरह खेलं।स्कूल या बाहर से लौटने पर उनसे पूछें— आज तुम्हें सबसे अच्छा क्या लगा। जब आप उनके पसंदीदा खेल और बातों में दिलचस्पी लेते हैं तो वे खुलकर अपनी हर बात आपसे शेयर करने लगते हैं।
डांटने के बाद समझाएं और उनकी भावनाएं समझें
जब बच्चा परेशान या गुस्सा हो तो उसे तुरंत चुप कराने की जगह उसकी भावनाओं को स्वीकार करे। बच्चे से कहें— मैं समझ सकता सकती हूं कि तुम निराश हो। यह वाक्य बच्चे को शांत करने में चमत्कारी असर दिखाता है। अगर कभी गुस्से में डांट पड़ जाए तो बाद में उसे दुलारते हुए ईमानदारी से वजह बताएं और समझाएं कि आपको गुस्सा नहीं करना चाहिए था।
वादों के पक्के बनें
बच्चे अपने माता-पिता के वादों को कभी नहीं भूलते। अगर आपने बच्चे से कोई वादा किया है तो उसे हर हाल में पूरा करें। यदि किसी जरूरी वजह से वादा पूरा न हो पाए तो उनसे सच बोलें और कारण समझाएं। री-शेड्यूल करें और बाद में उस वादे को जरूर निभाएं। इससे बच्चे के अंदर सच्चाई और भरोसे की नींव मजबूत होती है।पैरेंटिंग कोई कठिन काम नहीं है बस थोड़े से धैर्य और प्यार की जरूरत होती है। बच्चों को महंगे खिलौने नहीं बल्कि आपका बिना शर्त प्यार और ध्यान चाहिए।
हेमलता शर्मा जयपुर
#क्या देखा अपने उर्वशी रौतेला का गॉर्जियास अवतार






