बागवानी का नया अंदाज़ : अब गुलाबों की मुस्कान से ज्यादा समय महकेगा आपका घर

बागवानी का नया अंदाज़ : अब गुलाबों की मुस्कान से ज्यादा समय महकेगा आपका घर

अक्सर देखा जाता है कि हम बड़े उत्साह के साथ नर्सरी से गुलाब के सुंदर और लदे हुए पौधे खरीदकर लाते हैं लेकिन कुछ ही दिनों में उनकी रौनक फीकी पड़ने लगती है। कई बार पौधे में पत्तियाँ तो खूब घनी और हरी-भरी हो जाती हैं लेकिन उनमें कलियाँ आना पूरी तरह बंद हो जाती हैं। 

एक बागवान के लिए यह स्थिति किसी निराशा से कम नहीं होती। असल में गुलाब का पौधा केवल मिट्टी और पानी का मेल नहीं है बल्कि यह एक संवेदनशील जीव है जिसे सही दिशा में धूप सटीक पोषण और समय पर देखभाल की ज़रूरत होती है। ​यदि आपके बगीचे के फूलों के राजा ने खिलना छोड़ दिया है, तो इसका मतलब है कि उसे मिलने वाली बुनियादी सुविधाओं में कहीं कमी रह गई है। 

गुलाब की हर किस्म की अपनी एक भाषा होती है—चाहे वह मार्च-अप्रैल की वसंत ऋतु हो या गर्मियों की शुरुआत सही तकनीक अपनाकर आप साल के अधिकतर महीनों में अपने आंगन को इन फूलों से गुलज़ार रख सकते हैं। आइए जानते हैं वे खास राज़ जिनसे आपके पौधे न केवल स्वस्थ रहेंगे बल्कि उनमें फूलों की ऐसी बौछार आएगी कि देखने वाले दंग रह जाएंगे। 

सुझाव और तकनीकः ​

धूप का जादू: 
गुलाब को सूर्य प्रेमी पौधा माना जाता है। यदि आपका गमला ऐसी जगह रखा है जहाँ पर्याप्त रोशनी नहीं पहुँचती तो उसे तुरंत हटाकर ऐसी जगह शिफ्ट करें जहाँ कम से कम 5-6 घंटे की सीधी और तेज़ धूप मिले। बिना सही धूप के पौधा अपनी ऊर्जा केवल पत्तियाँ बढ़ाने में खर्च करता है कलियों में नहीं। ​ 

मिट्टी की गुड़ाई और हवा का संचारः 
हर 20 से 25 दिनों में किसी खुरपी की मदद से गमले की मिट्टी की हल्की गुड़ाई ज़रूर करें। इससे जड़ों तक ऑक्सीजन का प्रवाह बेहतर होता है और जड़ें मिट्टी में गहराई तक जाकर मज़बूत बनती हैं।

​समय-समय पर छंटाईः 

सूखी पुरानी या अंदर की ओर मुड़ी हुई टहनियों को काटना बहुत ज़रूरी है। जब कोई फूल पूरी तरह खिलकर मुरझा जाए तो उसे डंडी समेत 4-5 पत्तियों के नीचे से काट दें। इससे पौधे को नई शाखाएं और कलियाँ निकालने का संकेत मिलता है। ​

पानी और पोषण का संतुलनः 

रोज़ाना थोड़ा-थोड़ा पानी देने के बजाय 2-3 दिन में एक बार गहराई तक पानी दें ताकि जड़ों के निचले हिस्से तक नमी पहुँचे। इसके साथ ही हर 15 दिन में गोबर की खाद वर्मीकंपोस्ट या सरसों की खली का घोल दें। पोटैशियम के लिए सूखे केले के छिलकों का पाउडर भी मिट्टी में मिलाया जा सकता है। ​

कीट नियंत्रण: 
अगर पत्तियों के नीचे छोटे कीड़े एफिड्स दिखें तो 5 मिली नीम के तेल को 1 लीटर पानी में मिलाकर हर हफ्ते छिड़काव करें। इससे पत्तियों का पीलापन दूर होगा और पौधा सुरक्षित रहेगा।

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